Anupam Kher Birthday Interesting Facts; Facial Paralysis | Saaransh
43 मिनट पहले
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अनुपम खेर को 2021 में हिंदू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका से दर्शनशास्त्र (हिंदू अध्ययन) में मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली।
एक लड़का, जिसने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय की तालीम हासिल की और बड़े ख्वाबों के साथ मुंबई पहुंचा। उसे एक फिल्म में शानदार किरदार मिला और उसने छह महीने तक पूरी लगन और मेहनत से उसकी तैयारी की। तभी अचानक खबर आई कि उसका रोल किसी और को दिया जा सकता है। मायूस होकर उसने मुंबई छोड़ने का फैसला कर लिया और आखिरी दफा फिल्म के डायरेक्टर महेश भट्ट से मिलने गया।
गुस्से में उसने उन्हें खरी-खोटी भी सुना दी। मगर उसकी सच्चाई, हिम्मत और जुनून देखकर महेश भट्ट ने फैसला किया कि यह किरदार वही निभाएगा। इसके बाद 28 साल की उम्र में उसने बुजुर्ग का रोल इतने शानदार तरीके से अदा किया कि उसे बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। बस, इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के मशहूर एक्टर अनुपम खेर की।
आज अनुपम खेर के बर्थडे के खास मौके पर आइए उनकी जिंदगी को करीब से छूते हैं-
पिता थे वन विभाग में क्लर्क
7 मार्च 1955 को शिमला (हिमाचल प्रदेश) में एक कश्मीरी पंडित परिवार में पैदा हुए अनुपम खेर के पिता पुष्कर नाथ खेर वन विभाग में क्लर्क थे, जबकि उनकी माता दुलारी खेर गृहिणी थीं। उनकी स्कूल की पढ़ाई शिमला के डी. ए. वी. स्कूल से हुई थी। अनुपम खेर के एक छोटे भाई राजू खेर हैं।

अनुपम खेर के भाई राजू खेर भी एक एक्टर और डायरेक्टर हैं।
अनुपम खेर की पहली किस का किस्सा अनुपम खेर ने शो आप की अदालत में बताया था कि ग्यारहवीं कक्षा में उन्हें अपने मोहल्ले में आई एक लड़की से प्यार हो गया था। वह लड़की अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ती थी और एक आर्मी ऑफिसर की बेटी थी। अनुपम खेर और उनके दोस्त विजय सहगल कई महीनों तक साइकिल से उसके पीछे-पीछे जाते रहे, लेकिन अनुपम मोहब्बत का इजहार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। छोटे शहर का माहौल था, जहां जज्बात दिल में रहते थे और अल्फाज होंठों तक आते-आते रुक जाते थे।
करीब दो महीने बाद दोस्त के कहने पर उन्होंने लड़की से “आई लव यू” कह दिया, जिस पर लड़की ने जवाब में “मी टू” कहा। अनुपम खेर को उस समय अंग्रेजी ज्यादा समझ नहीं आती थी और वह “मी टू” का मतलब भी फौरन नहीं समझ पाए। बाद में दोस्त ने समझाया कि इसका मतलब है कि वह भी उनसे मोहब्बत करती है।
इसके बाद उनके दोस्त ने उन्हें लड़की से “आई वांट टू किस यू” कहने की सलाह दी। उस दौर में ऐसा कहना बहुत बड़ी बात होती थी। एक महीने बाद उन्होंने हिम्मत कर यह भी कह दिया, जिस पर लड़की ने जवाब में कहा कि स्कूल के एनुअल फंक्शन के दिन वह उन्हें किस करेगी।

हालांकि बाद में अनुपम खेर को ध्यान आया कि एनुअल फंक्शन में अभी आठ महीने बाकी थे। इसी दौरान दोस्त ने मजाक में उन्हें किस की प्रैक्टिस करने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने शीशे के गिलास से अभ्यास करना शुरू कर दिया, जिससे उनके होंठ कट गए और सूज गए।
परिवार में किसी ने सूट नहीं पहना था
कहानी में नया मोड़ तब आया जब लड़की ने शर्त रखी कि वह एनुअल फंक्शन में साड़ी पहनकर आएगी और अनुपम खेर को सूट पहनकर आना होगा। खेर ने बताया था कि उनके परिवार में पहले किसी ने सूट नहीं पहना था। जब उन्होंने घर पर सूट की मांग की तो परिवार हैरान रह गया। किसी तरह उन्होंने पिता को स्कूल के कार्यक्रम का बहाना देकर राजी किया और सूट सिलवाया।
तय दिन पर दोनों ने रेलवे ब्रिज के नीचे मिलने का फैसला किया। किस करने से पहले वह और उनके दोस्त ने वहां के बल्ब तक तोड़ दिए ताकि कोई देख न सके। रात करीब साढ़े आठ बजे लड़की साड़ी में पहुंची और वह खुद नीले सूट में पहुंचे।
दोनों के बीच कुछ देर खामोशी रही। जैसे ही वह किस करने के लिए आगे बढ़े, उसी समय लड़की के घर की लाइट जल गई और उसके पिता दरवाजे पर दिखाई दिए। घबराहट में लड़की ने अपना चेहरा मोड़ लिया और अनुपम खेर का पहला किस उसके होंठों की बजाय उसके कान पर जा लगा। इंटरव्यू में खेर ने कहा कि उनका पहला किस डिजास्टर साबित हुआ था।
NSD से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं
स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुपम ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से संबद्ध गवर्नमेंट कॉलेज, संजौली में अर्थशास्त्र की पढ़ाई शुरू की। लेकिन बाद में भारतीय रंगमंच का अध्ययन करने के लिए उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में प्रवेश लिया और अपना पहले वाला कोर्स बीच में ही छोड़ दिया। बाद में उन्होंने 1978 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली से भी एक्टिंग की बारीकियां सीखीं।
28 साल की उम्र में बुजुर्ग का किरदार निभाया
लंबे संघर्ष के बाद उन्हें फिल्म सारांश (1984) में एक शानदार भूमिका निभाने का मौका मिला, लेकिन कुछ दिनों बाद उनका रोल बदलने की बात होने लगी। हालांकि उनका कॉन्फिडेंस और इरादा देखकर फिल्म के डायरेक्टर महेश भट्ट ने वही रोल दिया जो उनको ऑफर किया गया था। इसके बाद अनुपम को फिल्म से एक शानदार पहचान मिली।

सारांश में अनुपम खेर ने बी.वी. प्रधान का रोल किया था, जो 65 साल के रिटायर्ड स्कूल टीचर थे और अपने इकलौते बेटे को खोने के गम से जूझ रहे थे।
इस फिल्म में उन्होंने बुजुर्ग पिता का किरदार निभाया, जबकि उस वक्त उनकी उम्र करीब 28 साल थी। फिल्म व्यावसायिक तौर पर बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन फिल्म समीक्षकों ने उनकी अदाकारी की जमकर तारीफ की। उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला और यह फिल्म उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
इसके बाद उन्होंने विलेन, कॉमेडी और करेक्टर रोल में खुद को साबित किया। कर्मा, तेजाब और चालबाज जैसी फिल्मों में उनके नेगेटिव रोल चर्चा में रहे। वहीं राम लखन और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में उनकी कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आई।
1990 और 2000 के दशक में वह लगातार सफल फिल्मों का हिस्सा रहे। हम आपके हैं कौन..!, कुछ कुछ होता है, ए वेडनसडे!, एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी और द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। उन्होंने 500 से अधिक फिल्मों में काम किया है। एक्टिंग के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार सहित कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।

अमिताभ से प्रोफेशनलिज्म का सबक मिला था
साल 1986 था और फिल्म आखिरी रास्ता की शूटिंग चल रही थी। उस दौर में चेन्नई की भीषण गर्मी के बीच अनुपम खेर को अमिताभ बच्चन से प्रोफेशनलिज्म का एक सबक मिला था।
दरअसल, उन दिनों अनुपम खेर फिल्म सारांश की कामयाबी के बाद खुद को बड़ा स्टार समझने लगे थे। शोहरत का असर था और थोड़ा सा गुरूर भी आ गया था। चेन्नई में 40-45 डिग्री तापमान था। उनके मेकअप रूम का AC खराब हो गया। इस बात पर उन्होंने प्रोडक्शन टीम पर काफी गुस्सा किया।
जब वे सेट पर पहुंचे, तो मंजर कुछ और ही था। उन्होंने देखा कि अमिताभ बच्चन एक कोने में खामोशी से बैठे अपनी लाइनों की तैयारी कर रहे थे। हैरानी की बात यह थी कि इतनी सख्त गर्मी में भी उन्होंने भारी दाढ़ी, मूंछ, विग, जैकेट और यहां तक कि एक शॉल ओढ़ रखी थी।
यह देख अनुपम से रहा नहीं गया और उन्होंने अमिताभ से तअज्जुब से पूछा, “सर, इतनी भीषण गर्मी में आपने यह सब पहन रखा है, क्या आपको गर्मी नहीं लग रही?” इस पर अमिताभ ने मुस्कुराते हुए बहुत ही गहरी बात कही, “अनुपम, गर्मी के बारे में सोचता हूं तो लगती है, नहीं सोचता तो नहीं लगती।”
अमिताभ की इस एक लाइन ने अनुपम का नजरिया बदल दिया। उन्हें एहसास हुआ कि एक कलाकार को बाहरी सुख-सुविधाओं से ज्यादा अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उस दिन के बाद से उन्होंने कभी भी सेट पर AC या पंखे के लिए कोई हंगामा नहीं किया।

अमिताभ बच्चन और अनुपम खेर ने ‘आखिरी रास्ता’, ‘सूर्यवंशम’, ‘ऊंचाई’, ‘हम’, ‘मोहब्बतें’ और ‘सरकार’ जैसी कई फिल्मों में एक साथ काम किया है।
बैंक खाते में महज 400 रुपए बचे थे
अनुपम खेर साल 2004 के आसपास एक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। उनके बैंक खाते में उस वक्त महज 400 रुपए बचे थे और वे दिवालिया होने के कगार पर थे। समदिश के पॉडकास्ट में खेर ने बताया था कि उस दौर में वे एक बड़ा टीवी प्रोडक्शन हाउस खड़ा करने का ख्वाब देख रहे थे और खुद को टीवी टायकून के तौर पर स्थापित करना चाहते थे।
अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भारी कर्ज लिया, लेकिन बढ़ते ब्याज ने हालात को और ज्यादा संगीन बना दिया। हालात यहां तक पहुंच गए कि उन्हें अपना घर और दफ्तर तक गिरवी रखना पड़ा।

अनुपम खेर ने सतीश कौशिक के साथ मिलकर ‘करोल बाग प्रोडक्शन’ की भी स्थापना की थी।
दिलचस्प बात यह रही कि उसी दौरान वे बड़े बैनर की फिल्मों में काम कर रहे थे, इसलिए बाहरी दुनिया को उनके इस संघर्ष और परेशानी का अंदाजा नहीं था। हालांकि, इस मुश्किल दौर के बाद उन्होंने दोबारा हौसले के साथ शुरुआत की और फिर कई फिल्मों में काम कर इस संकट से बाहर निकले।

चेहरे के लकवे के बावजूद की फिल्म की शूटिंग जब अनुपम खेर का करियर बुलंदी पर था और वे करीब 150 फिल्मों में काम कर चुके थे, उसी दौरान अचानक उन्हें फेशियल पैरालिसिस हो गया। टीवी शो आप की अदालत में अनुपम खेर ने बताया था कि एक दिन वे अनिल कपूर के घर खाना खा रहे थे। तभी अनिल की पत्नी सुनीता ने उनसे कहा कि वे एक आंख से पलक नहीं झपका रहे हैं।
पहले उन्हें लगा कि शायद यह थकान की वजह से है, लेकिन अगले दिन जब वे ब्रश कर रहे थे तो पानी अपने आप मुंह से बाहर टपकने लगा। नहाते वक्त साबुन आंख में चला गया। तब उन्हें एहसास हुआ कि मामला गंभीर है।
वे फौरन फिल्ममेकर यश चोपड़ा के पास पहुंचे। यश चोपड़ा ने उन्हें डॉक्टर के पास भेजा। बॉम्बे हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन ने जांच के बाद बताया कि उन्हें फेशियल पैरालिसिस है और दो महीने तक पूरा आराम करने की सलाह दी।

फिल्म ‘हम आपके हैं कौन..!’ (1994) में अनुपम खेर ने माधुरी दीक्षित के पिता प्रोफेसर सिद्धार्थ चौधरी का किरदार निभाया था।
डॉक्टर ने दवाएं शुरू करने को कहा और काम से दूरी बनाने की हिदायत दी। इसी दिन फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ के सेट पर उनका पहला दिन था, जहां अंताक्षरी वाला मशहूर सीन शूट होना था। खेर ने बताया था कि डॉक्टर की सलाह के बावजूद उन्होंने शूटिंग जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि अगर वे डरकर घर बैठ जाएंगे तो जिंदगी भर बीमारी से डरते रहेंगे।
जब वे सेट पर पहुंचे तो पहले सलमान खान और माधुरी दीक्षित को लगा कि वे मजाकिया अंदाज में एक्टिंग कर रहे हैं। बाद में उन्होंने पूरी टीम को अपनी हालत बताई, लेकिन साफ कहा कि वे काम करने के लिए तैयार हैं। अनुपम खेर ने कहा था कि जिंदगी कभी-कभी ऐसे इम्तिहान लेती है, जो इंसान को अपनी असली हिम्मत का एहसास कराते हैं।
‘बेस्ट कॉमेडियन’ कैटेगरी में पांच फिल्मफेयर जीते बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर के नाम फिल्मफेयर अवॉर्ड में ‘बेस्ट कॉमेडियन’ कैटेगरी में सबसे ज्यादा पांच बार जीतने का रिकॉर्ड है। उन्हें यह सम्मान राम लखन (1989), लम्हे (1991), खेल (1992), डर (1993) और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995) में शानदार एक्टिंग के लिए मिला था।
खास बात यह थी कि उन्होंने 1992 से 1994 तक लगातार तीन साल यह अवॉर्ड जीतकर एक अलग मुकाम बनाया। इस कैटेगरी में उनके बाद एक्टर मेहमूद का नाम आता है, जिन्होंने चार बार यह पुरस्कार जीता। हालांकि, फिल्मफेयर ने 2007 के बाद ‘बेस्ट कॉमेडियन’ की अलग कैटेगरी खत्म कर दी थी।

वेटर ने हॉलीवुड फिल्म का ऑडिशन रिकॉर्ड किया था
अनुपम खेर को हॉलीवुड फिल्म सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक में काम करने का मौका मिला, जिसमें रॉबर्ट डी नीरो, ब्रैडली कूपर और जेनिफर लॉरेंस जैसे कलाकार थे और डायरेक्टर डेविड ओ. रसेल थे। फिल्म में एक हिंदुस्तानी किरदार की जरूरत थी, जिसके लिए अनुपम खेर को ऑडिशन देना था।
दरअसल, उस वक्त अनुपम खेर राजस्थान के एक छोटे से गांव में शूटिंग कर रहे थे, इसलिए उनका स्काइप से ऑडिशन होना था। आज से करीब 15 साल पहले गांव में स्काइप की व्यवस्था अपने आप में एक चुनौती थी। किसी तरह कंप्यूटर लगाया गया, मगर ऑडिशन के वक्त आवाज काम नहीं कर रही थी। इसलिए उधर से मैसेज आया-“नेक्स्ट टाइम बी मोर प्रोफेशनल।” खेर को गुस्सा आया, जिस पर उन्होंने जवाब दिया, “गूगल सर्च मी।” इसके बाद तय हुआ कि टोरंटो में दोबारा ऑडिशन होगा।
टोरंटो पहुंचकर अनुपम खेर पूरे एहतियात के साथ तैयार बैठे थे। दिल में ख्वाहिश थी कि रॉबर्ट डी नीरो के साथ काम करने का मौका मिलेगा। मगर किस्मत ने फिर इम्तिहान लिया। तकनीकी खराबी आ गई और उन्हें फोन पर कहा गया कि अगर सुबह तक लिंक नहीं मिला तो रोल हाथ से निकल जाएगा।
तभी होटल के एक बांग्लादेशी वेटर अब्दुल को अनुपम खेर ने अपनी परेशानी बताई। उसने कहा कि उसके पास आईफोन 3 है, जिससे वह शूट करके लिंक भेज सकता है। इस तरह ऑडिशन रिकॉर्ड हुआ और उन्हें रोल मिल गया।

रॉबर्ट डी नीरो ने अनुपम खेर से माफी मांगी थी
इसके बाद शूटिंग के दौरान जब अनुपम खेर पहली बार रॉबर्ट डी नीरो से मिले तो उनके जज्बात काबू में नहीं रहे। उन्होंने उन्हें गणेश जी की खूबसूरत मूर्ति भेंट की, जिस पर रॉबर्ट डी नीरो की ओर से उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन फिल्म सेट पर रॉबर्ट डी नीरो पूरी तरह अपने किरदार में थे। एक सीन में उनका किरदार गुस्से में डॉक्टर बने अनुपम खेर को घर से बाहर निकाल देता है। रिहर्सल में उन्होंने सचमुच धक्का देकर बाहर कर दिया। इसके बाद सीन बदलने की बातें होने लगीं।

रॉबर्ट डी नीरो ने न्यूयॉर्क में अनुपम खेर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘तन्वी द ग्रेट’ के प्रीमियर में अपनी पार्टनर टिफनी चेन के साथ शिरकत की थी।
तब खेर ने हिम्मत दिखाते हुए कहा, “आठ लोग सीन में हैं, आपने सिर्फ एक का नजरिया सुना है। मेरे किरदार की भी बात है।” माहौल में सन्नाटा छा गया। दोबारा रिहर्सल हुई और सीन संतुलन के साथ शूट हुआ। जिसके बाद रात ढाई बजे डी नीरो ने उन्हें वैन में बुलाकर कहा, “आई एम सॉरी, आई वॉज़ सेल्फिश।”
अनुपम खेर और किरण खेर की लव स्टोरी
अनुपम खेर और किरण खेर की लव स्टोरी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। यह कहानी दोस्ती से शुरू होकर गहरे प्यार तक पहुंची। अनुपम की पहली शादी एक्ट्रेस मधुमालती कपूर से हुई थी। दोनों की मुलाकात नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में पढ़ाई के दौरान हुई। 1979 में परिवार की रजामंदी से उन्होंने शादी की, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। जिसके बाद एक साल के भीतर ही दोनों अलग हो गए।
इसके बाद अनुपम खेर की जिंदगी में फिर से किरण आईं। दरअसल, अनुपम और किरण की पहली मुलाकात चंडीगढ़ में थिएटर के दिनों में हुई थी। दोनों रंगमंच से जुड़े थे और धीरे-धीरे बहुत अच्छे दोस्त बन गए। करीब दस साल तक उनकी दोस्ती कायम रही। वे एक-दूसरे के राजदार थे। किरण जानती थीं कि अनुपम किस लड़की को पसंद करते हैं और अनुपम को भी किरण की हर बात मालूम होती थी। लेकिन तब तक उनके बीच सिर्फ दोस्ती थी, प्यार का एहसास नहीं।

समय बदला। किरण की शादी बिजनेसमैन गौतम बेरी से हो चुकी थी, लेकिन उनकी शादीशुदा जिंदगी खुशहाल नहीं थी। उधर अनुपम भी अपनी पहली शादी से अलग हो चुके थे।
इसी बीच किरण एक नाटक के सिलसिले में कोलकाता गई थी। उस समय अनुपम एक फिल्म के लिए सिर मुंडवाए हुए थे। एक शाम जब वे किरण के कमरे से निकल रहे थे, तो अचानक दोनों की नजरें मिलीं। थोड़ी देर बाद अनुपम ने दरवाजा खटखटाया और साफ शब्दों में कहा, “मुझे लगता है मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं।” उस पल सब कुछ बदल गया। दोस्ती की जगह प्यार ने ले ली।

सिकंदर खेर एक एक्टर हैं, जो ‘वुडस्टॉक विला’ और ‘आर्या’ जैसे प्रोजेक्ट्स में दिख चुके हैं।
किरण ने भी अपने दिल की आवाज सुनी। उन्होंने अपनी पहली शादी खत्म की और 1985 में अनुपम खेर से शादी कर ली। आज उनकी शादी को चार दशक से ज्यादा हो चुके हैं। अनुपम ने किरण के बेटे सिकंदर खेर को अपने बेटे की तरह अपनाया।
अनुपम खेर के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स
अनुपम खेर ने अपने करियर की 550वीं फिल्म ‘खोसला का घोसला 2’ की शूटिंग जनवरी में शुरू कर दी है। यह फिल्म 2006 की चर्चित कल्ट क्लासिक ‘खोसला का घोसला’ का सीक्वल है। फिल्म का निर्देशन उमेश बिष्ट कर रहे हैं, जबकि इसमें बोमन ईरानी भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।
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